देश में चंद पूंजीपतियों की सरकार : राकेश टिकैत

बुंदेलखण्ड पहुंचे टिकैत बोले, सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दे 
बांदा

किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत इन दिनों घूम-घूम कर केंद्र की नरेंद्र व यूपी की योगी सरकार को घेरकर हमला कर रहे हैं । 
रविवार को बांदा पहुंचे राकेश टिकैत ने जुबानी हमला करते हुए कहा कि देश में किसी पार्टी की नहीं बल्कि चंद उद्योगपति व पूंजीपतियों की पंसदीदा नरेन्द्र मोदी की सरकार है।


 पत्रकारों के सवाल का ज़वाब देते हुए कहा कि देश में अगर किसी राजनीतिक दल की सरकार होती, तो किसानों की समस्याओं पर विचार कर दस माह से चलाए गए आंदोलन को समाप्त करने का हल निकाल लिया जाता। देश में सिर्फ मोदी सरकार है,  और उनके साथ बड़ी-बड़ी कंपनियां है। जिनके चलते किसान आंदोलन के मुद्दों पर सुनवाई नहीं हो रही है।


सरकार के विरोध में देश के नौजवानों को होना होगा, आगे 
राकेश टिकैत ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार सरकार रेलवे का निजीकरण कर रही है।  स्पेशल ट्रेनों का नाम पर रेलवे टिकट महंगे किए गए और प्लेटफार्म टिकट के दाम भी अब तक  कम नहीं हुए हैं। एयरपोर्ट, एलआईसी व  भारत पेट्रोलियम जैसे सभी सार्वजनिक उपक्रम को बारी-बारी से बेंचा जा रहा है,  अब इसके विरोध में नौजवानों को आगे आना होगा। किसान नेता ने तीनों कृषि संबंधित कानून वापस लेने व किसानों को एमएसपी ( MSP ) की गारंटी दे।

किसानों को हर हालत में फसलों के समर्थन मूल्य की गारंटी मिले, चाहे इसके लिए सरकार उपज खरीदे अथवा व्यापारी।किसान की उपज का बड़ा भाग बिचौलिए खरीदकर उसे एमएसपी के मूल्य पर बेंचते है। यह अपने आप में एक घोटाला है। सरकार ने चुनाव के पहले स्वामीनाथन कमेटी वाली सिफारिश लागू ना कर, किसानों से किए  अपने वायदे से सरकार मुकर गई है। जिस तरह से सरकार पूरे संसाधन बेच रही है इसका  सीधा प्रभाव जनता पर पड़ेगा। निजीकरण और बाजारीकरण से बेरोजगारी बढ़ेगी,  सरकार बड़े-बड़े गोदाम बनाकर पूरे अनाज पर कब्जा कर रोटी को तिजोरी में बंद करना चाह रही है जबकि रोटी सबसे जरूरत की चीज है ।  

बुंदेलखंड के  किसानों की तारीफ करते हुए उन्हें मेहनती किसान बताते हुए कहा कि यहां न्याय नहीं हो रहा। फसलों का वाजिब मूल्य न मिलने से किसान कर्ज में डूब कर आत्महत्या कर रहा है। यहां जानवरों की ‘अन्ना प्रथा’ की समस्या से किसान  परेशान है। किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि बुंदेलखंड जोन बनाकर यहां किसानों को लाभ दिया जा सकता है,  यहां का कटिया गेहूं और दालें किसानों की हालत ठीक कर सकती हैं।  खनन संपदा को लूटने का काम किया गया जबकि खनन से होने वाली आय का 80 फीसद हिस्सा बुंदेलखंड के विकास में खर्च होना चाहिए था, यहां थोड़े प्रयास से टूरिज्म के जरिए आय बढ़ाई जा सकती है। बुंदेलखंड की उपेक्षा के चलते  सैकड़ों नौजवान  दिल्ली सहित अन्य शहरों में पलायन करने के लिए मजबूर हैं ।

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